Monday, August 17, 2020

        लॉक डाउन की कविता        

हाल-चाल  

लॉक डाउन मे ठीक नहीं है भइया हाल-चाल

काम धाम कुछ बचा नहीं अब हमतो हुये अलाल

रात – रात भर जाग रहे और दिन भर सोते लाल

धीरे – धीरे खत्म हो रहा सबके घर का माल

लगता है मुश्किल होगा अब खाना रोटी दाल

बैठे – बैठे घर मे ही ना हो जाएँ कंगाल

लॉक डाउन मे ठीक नहीं है भइया हाल-चाल

 

आलू धनिया और टमाटर कीमत सबकी लाल

कभी खुले तो बंद कभी , ये दुकानों के हाल

पढ़ना लिखना ऑनलाइन है बच्चे हुये बेहाल

बिन रिचार्ज मोबाइल बंद है कैसे करें सवाल

लॉक डाउन मे ठीक नहीं है भइया हाल-चाल

 

दाढ़ी मूंछ बढ़े जाते हैं बढ़ रहे बेजा बाल

घर बैठे सब बोर हो रहे हीरो हीरालाल

ना बाजार ना ही श्रंगार है ना त्योहार इस साल

शादी ब्याह, समारोह ना कोई धूम - धमाल

बस सरकारी धमाचौक है बाकी ठन-ठन गोपाल

लॉक डाउन मे ठीक नहीं है भइया हाल-चाल

 हाय कोरोना तूने जाने कैसा फेंका जाल

         सपने मे दिखते हैं सबको कोबिड पेशेंट अस्पताल 

बिन पानी जस तड़पे मछली वैसे सबका हाल   

घर मे कबसे बंद पड़े हैं लड्डू बाल गोपाल

लॉक डाउन मे ठीक नहीं है भइया हाल-चाल  

 -    रामकुमार विद्यार्थी’ 17 अगस्त 2020 


Tuesday, June 9, 2020

https://anyflip.com/pheoi/hacj/




फाइल फोटो 
राष्ट्रीय युवा संगठन एक " प्रहरी " 

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Saturday, June 15, 2019

राष्ट्रीय युवा संगठन का 24 वां राष्ट्रीय शिविर संपन्न हुआ


देश भर के 150 युवा हुए शामिल, गांधी , विनोबा, जयप्रकाश के विचार धारा पर हुई चर्चा


गुरदासपुर – 7 जून 2019
गांधी विचार धारा पर कार्यरत राष्ट्रीय युवा संगठन का 24 वां राष्ट्रीय शिविर बाबा आया सिंह रिआर्की कॉलेज , तुगलवाल में संपन्न हुआ | 1 से 7 जून तक चले इस शिविर में गांधी, विनोबा, जयप्रकाश के विचार और युवा विषय पर गांधी विचारक रामचंद्र राही , गांधी का अध्यात्म एवं गांधी और उनसे जुडी भ्रांतियों के सन्दर्भ में कुमार प्रशांत ने युवाओं से चर्चा की |
देश कि आर्थिक स्थिति एवं रोजगार के मसले पर प्रेरणा देसाई , शिक्षा की स्थिति पर राष्ट्रीय संयोजक डॉ. विश्वजीत राय एवं सत्यप्रकाश भारत ने चर्चा की | वरिष्ठ गांधीवादी अमरनाथ भाई एवं सवाई सिंह ने गांधी विचार से जुड़े अपने अनुभव साझा किये | इस मौके पर डॉ. एस. एन . सुब्बाराव ने युवाओं को जेपी आन्दोलन और डाकू समर्पण की कहानी सुनायी | हिंसा मुक्त जैविक खेती के सन्दर्भ में डॉ. विशाल , राजवीर सिंह एवं पिंगलवाडा ट्रस्ट से जुड़े समाज सेवियों ने अपने अनुभव युवाओं को सुनाये |
इन राज्यों के युवाओं ने लिया हिस्सा -
शिविर में महाराष्ट्र , गुजरात , राजस्थान , महाराष्ट्र , मध्यप्रदेश , दिल्ली , मुंबई , पंजाब , काश्मीर , मणिपुर , बिहार , छत्तीसगढ़ एवं ओरिसा के 150 युवाओं ने हिस्सा लिया | यहाँ  डॉ. धर्मेन्द्र ने योगासन सिखाया तथा स्वदेशी साबुन बनाने कि विधि बतायी | संगठन का विस्तृत परिचय मनोज ठाकरे ने दिया | क्रांति गीत , चौपाल , खेल और सांस्कृतिक कार्यक्रम से युक्त इस शिविर का सञ्चालन प्रेरणा देसाई और प्रशांत नागोसे ने किया | इस आयोजन को सफल बनाने में बाबा आया सिंह रिआर्की कॉलेज के प्रबंधक स्वर्ण सिंह, गगन सिंह एवं कॉलेज परिवार का विशेष सहयोग रहा |


Wednesday, May 8, 2019

राष्ट्रीय युवा संगठन (RYS) क्या , क्यों , कैसे ?



    अखंड मानवता का गठन : राष्ट्रीय युवा संगठन 

एक प्रश्न सब पूछते हैं - युवकों से क्या होगा ? यह भी तो पूछते ही हैं कि संगठन क्यों करना है ? अब तो यह भी पूछा जाने लगा है कि राष्ट्रीय क्या होता है ? एकदम ही खो गयी हैं वे पहचानें जिनसे एक राष्ट्र बनता है, भविष्य की तरफ बढ़ने व उसके लिये काम करने वाली नयी पीढ़ी तैयार होती है।

Logo RYS
रायुसं - राष्ट्रीय युवा संगठन - 

एक एैसी कोशिश का नाम है जो युवाओं की संगठित शक्ति से राष्ट्रीय सोच बनाना चाहता है। हम एक ऐसे संगठन के सदस्य हैं जो भारतीय से छोटी किसी पहचान को स्वीकार नहीं करता है। यह बौनी पहचान, बौनी सोच और बौनी कर्म से लोगों को बांधने वाली हर ताकत का विरोध करता है, उनसे संघर्ष करने की तैयारी रखता है।

तो कहें कि राष्ट्रीय सोच से संपन्न, संगठन के अनुशासन से बंधे ऐसे युवाओं का यह भाईचारा है कि जो अपना केरियर बनाने के साथ -साथ अपना समाज भी बनाना चाहते हैं । हम जानते हैं कि जो सिर्फ केरियर बनाते हैं उनका न केरियर बनता है, न समाज ही ! आजादी के बाद यही हम भूल गये और आज ऐसे मुकाम पर खड़े हैं कि जहां से हर रास्ता अंधेरी गुफा में खो जाता है, और हम रोशनी की एक किरण के लिये तरसते रहते हैं । क्या आप कभी ऐसी घुटन, ऐसी असहायता महसूस करते हैं ? अगर हां, तो रायुसं आपके लिये ही बना है।

कब बना यह संगठन ?
5 जून 1994 को सेवाग्राम में, बापू - कुटी की छाया में देश के कई राज्यों से आये सौ से अधिक युवकों - युवतियों ने, कई दिनों की चर्चा और सर्वोदय आंदोलन के वरिष्ठ साथियों के सुझावों पर विचार करने के बाद यह तै किया कि हमें भी राष्ट्रीय स्तर पर अपना संगठन बनाना चाहिए ।

यह भी तय हुआ कि :
यह युवाओं का अपना संगठन होगा जिसके कार्यक्रम, नीति और फैसले वे युवा ही करेंगे जिनकी उम्र 15 से 35 वर्ष के बीच होगी और जो 10 रूपये प्रति वर्ष सदस्यता - शुल्क देकर अपनी सदस्यता नयी करवाते रहेंगे ।
यह राष्ट्रीय संगठन गांधी - विचार व कार्य के प्रति प्रतिबद्ध होगा और हमेषा तटस्थता से उसकी पड़ताल करेगा । यह व्यक्ति - पूजा नहीं, विचार - निष्ठा को रेखांकित करता है - गांधी के कंधे पर बैठकर, गांधी से आगे देखने का प्रयास !
यह संगठन किसी भी राजनीतिक दल या सांप्रदायिक संगठन से जुड़ा नहीं होगा, न इसका कोई सदस्य व्यक्तिगत रूप से भी इनसे किसी प्रकार का संबंध रखेगा ।
गांधी - विचार व कार्य के क्षे़त्र में पहले से काम कर रहे गांधीजनों से यह संगठन नजदीक का रिश्ता रखेगा और सम्मिलित कार्यक्रमों की योजना भी बनाएगा लेकिन इसकी अपनी स्वतंत्र स्थिति हमेशा बनी रहेगी।

क्या सपना है अपना ?
      
गांधी -विनोबा-जयप्रकाश के जीवन और चिंतन से प्रेरणा पाने वाले युवाओं ने यह समझा कि समाज में जो चैतरफा गिरावट आयी है उसे रोकने की लड़ाई चैतरफा ही हो सकती है। जयप्रकाश ने इसे संपूर्ण क्रांति का नाम दिया था। समाज - जीवन के सर्वप्रमुख सात खंड़ों में आमूल परिवर्तन ही संपूर्ण क्रांति है - सामाजिक, आर्थिक,राजनीतिक,शैक्षणिक, सांस्कृतिक ,नैतिक और आध्यात्मिक क्षेत्रों में यह आमूल परिवर्तन होगा और इनमें कोई आगे और पीछे नहीं बल्कि एक साथ ! इंद्रधनुष सी सतरंगी यह क्रांति ही रायुसं का सपना भी है और उसके होने का मतलब भी !
      
एक छोटा सा लेकिन गहरे अर्थ वाला हमारा संविधान है जिसमें जोर दिशा पर है और सावधानी फिसलन से बचने की है। हमारी कार्य - पद्धति चार अभिक्रमों को लेकर चलती है- शिक्षण, संगठन, रचना व संघर्ष ! हमारी व्यक्तिगत निष्ठा की तीन कसौटियां हैं श्रम, सेवा, स्वाध्याय ! राष्ट्रीय युवा संगठन का सदस्य -श्रम और श्रमजीवी से अपना संबंध रखेगा,सेवा के हर अवसर पर आगे रहेगा और अपना वैचारिक आधार मजबूत बनाने की दिशा में सजग रहेगा।
यह संगठन जिन मूल्यों को गहराई से मानता है और जिन्हें विकसित करने की दिशा में सक्रिय है, वे हैं- लोकतंत्र, सामाजिक न्याय, सर्वधर्म समभाव, स्वदेशी, राष्ट्रीय एकता, विश्वशांति तथा पर्यावरण की पूर्ण सुरक्षा !
    
जहां भी संगठन की सदस्यता ले चुके 5 युवा हैं वहां संगठन की प्राथमिक इकाई बन सकती है । हर इकाई अपने कार्यक्रम खुद ही बनाती है जिसका दिशा – निर्देश उपर की बातों में होता है। कार्यक्रम बनाने से लेकर उसे करने तक की जानकारी राष्ट्रीय कार्यालय में भेजी जानी चाहिए ताकि दूसरों तक वह जानकारी भेजी जा सके और कहीं कुछ गलती हो रही हो तो उसे सुधारा जा सके।
  
राष्ट्रीय कार्यालय से बीच -बीच में कार्यक्रम भेजे जाते हैं जो राष्ट्रीय स्तर के होते हैं। उन्हें निश्चित तारीखों में निश्चित तरीके से पूरा करना होता है। यह संगठन के राष्ट्रीय चरित्र को उजागर करता है। कार्यक्रमों के अलावा संगठन के भीतर प्रशिक्षण शिविरों का सिलसिला बराबर चलता रहता है जो 3, 5,या 7 दिनों के होते हैं- राष्ट्रीय स्तर पर दो शिविर होते हैं । जून के दौरान देश के किसी भी हिस्से में युवा शिविर होता है जिसमें सदस्य आमंत्रण से बुलाये जाते हैं। एक राष्ट्रीय सम्मेलन होता है जिसमें सभी उपस्थित सदस्य मिलकर अपना राष्ट्रीय संयोजक चुनते हैं। जो अगले सम्मेलन तक रायुसं की जिम्मेदारी संभालता है। उसकी मदद के लिए, सभी प्रांतीय संयोजकों को मिलाकर एक  राष्ट्रीय समिति बनती है।
    दूसरा राष्ट्रीय शिविर दिसंबर माह में होता है जो केवल लड़कियों के लिए होता है। व्यक्तित्व -विकास व सामूहिक कृतत्व - इन दोनों का विकास ही शिविरों का उद्देश्य है ।
विशेष परिस्थितियों में संगठन की सारी ताकत जोड़कर,एक ही कार्यक्रम हम उठाते हैं जिससे हमारी सम्मलित ताकत का पता चलता है ।
   
जहां होते हैं साथी, वहां पहुंचते हैं साथी ! प्रशिक्षक युवाओं की टीम उन इकाइयों में तथा प्रांत व जिला स्तरीय शिविरों में जाती हैं जहां साथी बुलाते हैं या संगठन की दृष्टि से जहां जाना जरूरी होता है। यह साथियों से जीवंत संपर्क रखने की प्रक्रिया है ।
    संपर्क के दो दूसरे माध्यम हैं - हर वक्त पत्राचार और हमारी अनियतकालीन पत्रिका प्रहरी ! राष्ट्रीय कार्यालय से लगातार ही विभिन्न सूचानाएं,जानकारियां आदि भेजी जाती हैं। पत्रिका में प्रकाशित होती है , आपके काम की जानकारी विभिन्न विषयों पर आपसी राय, आपके पत्र और सामायिक घटनाओं पर रायुसं का दृष्टिकोण!
   संघर्ष अगर शांतिमय तरीकों से करना है तो उसके हथियार भी नये गढ़ने होंगे। हम मानते हैं कि मनुष्य ही क्रांति का हथियार है और उसके लिए ही क्रांति करनी है। अतः चरित्र,विचार व व्यवहार तीनों स्तरों पर एक नया युवा - मन गढ़ने की जरूरत है, जो पद, पैसा और पदवी, राजनीतिक चालबाजी व गुटबाजी से अलग, इस भूमिका में काम करने वाले साथियों को संगठित करें। रायुसं इसकी ही कोशिश है।
इसलिए हम अपने कार्यक्रमों के अलावा जनता के बीच चल रहे उन शांतिमय संघर्षों से भी खुद को जुड़ा मानते हैं जो समाज का शक्ति -संतुलन बदलना चाहते हैं। जल जंगल और जमीन पर स्थानीय लोगों का नैसर्गिक अधिकार,गांव और शहरी मुहल्लों को पूर्ण स्वायत्तता का अधिकार, केन्द्र से गांव तक सत्ता का यथा संभव विकेन्द्रीकरण,मतदाताओं द्वारा अपने प्रतिनिधि पर अंकुश रखना, उसे वापस बुलाना, चुनाव में लोक उम्मीदवार खड़ा करना -रायुसं इन सबका समर्थन करता है, इनसे खुद को जोड़ता है ।
  
पुराना मिटाना, नया गढ़ना -साथ -साथ चलने वाली यह रणनीति हमारी है ।

कई बार लोग पूछते हैं - क्या थोड़े से युवाओं के करने से देष बदल जायेगा ? हमारा जवाब है कि एक बार नहीं, कई - कई बार इतिहास बदला है । सवाल केवल संख्या का नहीं , मजबूत संकल्प का भी है। रायुसं के बने कुछ ही साल तो हुए हैं लेकिन इसने अपनी एक जगह भी बना ली है और पहचान भी !
   सपने तो सभी देखते है- वे सब भी जो अक्सर सोये होते हैं । लेकिन रायुसं जागी आंखों का सपना है। सपने देखने और उसे साकार करने वालों की इन बिरादरी में हम आपको शामिल करने आये है। आज हम आपके बीच आये हैं, कल आप दूसरे युवाओं के बीच जायेंगे । अंधेरे के खिलाफ लड़ाई अंधेरे को कोसने से नहीं, रोशनी बांटने से ही लड़ी व जीती जा सकती है। रोशनी के लिए हम साथ लड़ेंगे ? हम आपका जवाब सुनना चाहते हैं.....

-: राष्ट्रीय कार्यालय :-

राष्ट्रीय युवा संगठन

           राजकला चौक, कुमारप्पा मार्ग, स्टेट बैंक के पास रामनगर, वर्धा -442001 ( महाराष्ट्र )            मो. 8007011887 , 9764271199 ryswardha@gmail.com #RysIndia 

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        लॉक डाउन की कविता         हाल-चाल     लॉक डाउन मे ठीक नहीं है भइया हाल-चाल काम धाम कुछ बचा नहीं अब हम तो हुये अलाल रात – रात भर ...